कर्नल राज्यवर्धन ने दिया झोटवाड़ा में शिक्षा का मानवीय मॉडलः नंबरों से आगे की सोच, मूल्य तय करेंगे मंजिल
जयपुर। जीवन बनाने के लिए एग्जाम्स सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं होते और न नंबर्स ही सब कुछ होते हैं। लेकिन नॉलेज हासिल करना और उसे जीवन में सही तरीके से इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है। ज्ञान किताबों से आता है, संवाद से आता है, एक-दूसरे को सुनने से आता है। आज गैजेट्स से भी नॉलेज मिलती है, लेकिन हमें उनका गुलाम नहीं बनना है उन्हें टूल्स की तरह इस्तेमाल करना है। उद्योग मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने शुक्रवार को विद्यार्थियों को सफलता का मंत्र दिया। वे आज जयपुर के हीरापुरा स्थित कमला देवी बुधिया राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में युवा संवाद और मेगा पीटीएम में विद्यार्थियों और पेरेंट्स-टीचर्स मीट को संबोधित कर रहे थे। सुबह 11ः00 बजे आयोजित मेगा पेरेंट्स-टीचर्स मीट में अभिभावक-शिक्षक और छात्रों के बीच कर्नल राज्यवर्धन स्वयं संवाद का सेतु बने। कार्यक्रम में कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों से आत्मीय संवाद किया और शिक्षा, संस्कार और बच्चों के सर्वांगीण विकास पर सारगर्भित विचार रखे। कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि हर पीटीएम में अभिभावक अक्सर बच्चों के नंबर और रैंक के बारे में ही पूछते हैं, लेकिन यह सोच बदलने की जरूरत है। उन्होंने बच्चों से संवाद करते हुए कहा कि नंबर सफलता की गारंटी नहीं देते लेकिन यह तय है कि हर व्यक्ति में कोई न कोई विशेष क्वालिटी जरूर होती है। आपको अपनी उसी अच्छाई को पहचानकर आगे बढ़ने की जरूरत है। शिक्षकों ने अच्छे माहौल में संवाद करते हुए अपने सुझाव रखे और कहा कि पीटीएम में माता-पिता केवल बच्चे के नंबरों के बारे में ही नहीं पूछें बल्कि अभिभावकों को यह भी पूछना चाहिए कि बच्चा खेल, कला, संगीत या अन्य गतिविधियों में कैसा है। हर बच्चे में कोई ना कोई गुण जरूर होता है। वह पढ़ाई के साथ ही किसी अन्य क्षेत्र में भी उत्कृष्ट हो सकता है। बच्चे की रूचि के अनुसार उसी दिशा में अगर बच्चे का हौसला बढ़ाया जाए तो वह आगे चलकर देश का नाम रोशन कर सकता है।
स्कूल के सीनियर शिक्षकों ने सुझाव दिया कि बच्चों पर पढ़ाई का अनावश्यक बोझ न डालते हुए उन्हें बिना तनाव पढ़ने का माहौल दिया जाना जरूरी है। शिक्षकों के इस सुझाव का कर्नल राज्यवर्धन ने समर्थन किया। पीटीएम में वरिष्ठ अध्यापिका ने सुझाव दिया कि बच्चे माता-पिता को कॉपी करते हैं इसलिए पेरेंट्स के लिए जरूरी है कि वे अपने बच्चों के सामने अपने माता-पिता का सम्मान करें। ताकि बच्चों को उनसे सीख मिल सके, इससे आने वाली पीढ़ियां अपने आप सुधर जाएंगी। इस विचार का कर्नल राज्यवर्धन ने सहर्ष स्वागत किया।
उन्होंने कहा मैं भी शिक्षक रहा हूं। सभी के लिए जरूरी संदेश यही है कि बच्चे वही करते हैं जो वो देखते है सुनते हैं। इसलिए हमें अपने माता-पिता यानी बच्चों के दादा-दादी का सम्मान करना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच सकारात्मक संवाद का मजबूत पुल तैयार किया, जिससे यह पीटीएम केवल बैठक नहीं बल्कि विचार और विश्वास का मंच बन गई




