रीको का फोकस : मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और उद्यमियों के प्रति सहयोगात्मक व्यवहार ही बनेगी संस्थान की नई पहचान – शिखर अग्रवाल
जयपुर। राजस्थान के औद्योगिक परिदृश्य को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने और राज्य में निवेश की गति को तीव्र करने के उद्देश्य से रीको द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘रेजिडेंशियल कैपेसिटी बिल्डिंग वर्कशॉप’ का शुक्रवार को समापन हुआ। जयपुर में आयोजित इस कार्यशाला में प्रदेश भर के 80 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया, जहां औद्योगिक विकास के आधुनिक मानकों और प्रशासनिक नवाचारों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यशाला के मुख्य सत्र को संबोधित करते हुए रीको अध्यक्ष शिखर अग्रवाल ने अधिकारियों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि “रीको की कार्यप्रणाली में अब निरंतर नवाचार समय की मांग है। हमारे औद्योगिक क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं की गुणवत्ता से कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” उन्होंने अधिकारियों को अपना विजन स्पष्ट करते हुए कहा कि “उद्यमियों को नीतियों का त्वरित लाभ मिले, अधिकारियों का व्यवहार पूर्णतः सहयोगात्मक हो और इंफ्रास्ट्रक्चर विश्वस्तरीय एवं मजबूत हो—यही रीको की असली पहचान बननी चाहिए।” अग्रवाल ने पर्यावरण और व्यवस्थाओं पर जोर देते हुए आगे कहा कि रीको क्षेत्रों में वेस्ट एवं एफ्यूलेंट मैनेजमेंट का उचित निस्तारण, सीईटीपी की प्रभावी मॉनिटरिंग और विद्युत-जल आपूर्ति की सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करना अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। कार्यक्रम के दौरान रीको प्रबंध निदेशक श्रीमती शिवांगी स्वर्णकार ने भी नॉलेज शेयरिंग के महत्व पर प्रकाश डाला और अधिकारियों को उद्यमियों की समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु प्रेरित किया। रीको प्रबंध निदेशक श्रीमती शिवांगी स्वर्णकार ने यह भी बताया कि रीको द्वारा विकसित सभी औद्योगिक क्षेत्रों के नाम में एकरूपता व स्पष्टता लाने एवं स्ट्रेटेजिक ब्रांडिंग करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है कि जिन औद्योगिक क्षेत्रों का क्षेत्रफल 50 हेक्टेयर तक है, उन्हें इंडस्ट्रियल ग्रोथ पार्क (IGP) कहा जाएगा तथा जिन औद्योगिक क्षेत्रों का क्षेत्रफल 50 हेक्टेयर से अधिक है, उन्हें रीको इकोनोमिक एवं इनवेस्टमेंट जोन (REIZ) कहा जाएगा।
इस दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में अधिकारियों को ‘रीको डिस्पोजल ऑफ लैंड रूल्स 1979’ के नवीनतम संशोधनों, ऑनलाइन मॉड्यूल्स और सिविल कार्यों में गुणवत्ता नियंत्रण की तकनीकी बारीकियों से अवगत कराया गया। व्यावहारिक समझ विकसित करने के लिए अधिकारियों को विशेष फील्ड विजिट भी कराई गई, ताकि वे जमीनी चुनौतियों का बेहतर समाधान निकाल सकें।




